Mar 28, 2021
105 Views
0 0

हम ये तो नहीं कहते

Written by

हम ये तो नहीं कहते कि हम तुझसे बड़े हैं
लेकिन ये बहुत है कि तिरे साथ खड़े हैं

वो आज सर करके दिखाने पर अड़े है
हम हैं कि अभी कल ही के पैरों पे खड़े हैं

ये बात तो उस बाग़ के हक़ में नहीं जाती
कुछ फूल भी काँटों की हिमायत में खड़े हैं

रुसवाई के इक डर को भी वह जीत न पाया
हम जिसके लिए सारे ज़माने से लड़े हैं

हूँ ख़ाक मगर मेरी मुहब्बत की बदौलत
ये चाँद सितारे तिरे कदमों में पड़े हैं

दुनिया से ‘वसीम’ आई निभाने की जहाँ बात
हम ख़ुद से अकेले में बहुत देर लड़े हैं

वसीम बरेलवी

Article Tags:
Article Categories:
Literature

Leave a Reply

%d bloggers like this: