Jan 16, 2021
218 Views
0 0

एक बैल की कहानी ….!!!!!!!!

Written by

वर्ष था 1950 भारत को आजाद हुए कुछ ही वक्त बीता था । देहरादून का इंडियन मिलिट्री ऐकेडमी के ज्वाइंट सर्विसेज विंग मे सेना , एयरफोर्स और नेवी के कैडेट्स की साझा ट्रैनिंग चल रही थी (क्योंकि उस वक्त तक खडगवासला मे नेशनल डिफेंस ऐकेडमी पूरी तरह से बनकर तैयार नही हुई थी ।

एक सत्रह साल के कैडेट को बाॅक्सिंग रिंग मे अपने सीनियर बैच के कैडेट का मुकाबला करना था । वो सीनियर कैडेट बडा ही ब्रिलियेंट और बेहतरीन बाॅक्सर था ।

वो सीनियर बैच का कैडेट था भविष्य का भारतीय सेना का सेनाध्यक्ष जनरल S.F. राॅड्रिग्स जिस का बाॅक्सिंग रिंग मे दबदबा रहता था ।

उसके सामने था सत्रह साल का जूनियर कैडेट नरेन्द्र कुमार शर्मा । पाकिस्तान के रावलपिंडी मे पैदा हुआ वो लडका ,जिसका परिवार देश के विभाजन के समय भागकर भारत आया था । घमासान बाॅक्सिंग मैच हुआ , और भविष्य के सेनाध्यक्ष ने जूनियर कैडेट नरेन्द्र कुमार शर्मा का भूत बनाकर रख दिया ।

वो जूनियर लडका बुरी तरह पिटा , मगर पीछे नही हटा । बार बार पलटकर आता , मारता और मार भी खाता मगर पीछे हटने को तैयार ना होता । अंतत: कैडेट S.F. राॅड्रिग्स ने वो मुकाबला जीत लिया । जूनियर कैडेट बुरी तरह पिटकर हारा जरूर मगर उसी बाॅक्सिंग मैच मे मैच देखने वाले कैडेट्स ने उसको एक #निकनेम दे दिया । जो जीवन भर उसके नाम से चिपका रहा । वो निकनेम था BULL यानि बैल ……

वो बैल मात्र तीन दिन पहले दिल्ली के धौलाकुंआ स्थित आर्मी के R.R. हाॅस्पिटल मे अपनी जिंदगी का आखिरी मुकाबला , मौत से हार गया ।

देश का एक हीरो चुपचाप दुनिया से चला गया Unknown and unsung ……बहुत कम लोगो को ये मालूम है नरेन्द्र कुमार “बुल” आखिर थे कौन ????

वो बंदा फौज मे कर्नल से आगे नही बढ सका । क्योकि हमेशा बर्फीले पहाडो की चोटिया लाँघते उस बैल के पैरो मे एक भी उंगली नही बची थी । उसके लगातार मिशन चलते रहे । सारी उंगलियां गलकर गिर गई । अपंग हुए , मगर उनके मिशन नही रूके ।

आज अगर भारत देश #सियाचीन_ग्लेशियर पर बैठा है । अगर भारत ग्लेशियरो की उन ऊँचाईयो का मास्टर है । एक एक रास्ते का जानकार है । और पाकिस्तान को सियाचिन से दूर रखने मे कामयाब रहा है । तो उसका श्रेय मात्र एक ही व्यक्ति को जाता है । वो थे कर्नल नरेन्द्र कुमार शर्मा यानि नरेन्द्र “बुल ” कुमार ……….

उन सुनसान बर्फीले ग्लेशियरो पर शून्य से 60 ° कम तापमान मे अपने देश की खातिर बुल ने ना जाने कितने अभियानो का नेतृत्व किया । नक्शे बनाये , उस दुर्गम क्षेत्र की एक एक जानकारी हासिल की । उनके नक्शे , फोटोग्राफ , भारत की ग्लेशियर पर विजय का आधार स्तंभ बने । इलाके मे विदेशी पर्वतारोही अभियानो और पाकिस्तानी दखल की जानकारी भारत और दुनिया को दी । उन रास्तो का पता लगाया , उनकी स्थिति नक्शे , फोटोग्राफ जहाँ से पाकिस्तानी सियाचीन पर कब्जा करने की ताक मे थे । वो सब अपने सैनिको को दी ।

यही वजह थी कि सरकार ने आॅपरेशन #मेघदूत जिसके जरिये सियाचीन पर कब्जा किया था । उस आॅपरेशन की जिम्मेदारी नरेन्द्र बुल कुमार की अपनी रेजीमेंट यानि #कुमायूँ_रेजीमेंट को दी थी ।

पूरा देश नरेन्द्र “बुल ” का ऋणी है । जिन्होने अपने शरीर के अंगो को बर्फ मे गलाकर , सालो साल दुर्गम ग्लेशियरो मे बिताकर , असंख्य चोटियाे पर पर्वतारोही अभियानो मे फतेह हासिल की । जो सही मायनो Father of siachen glacier कहलाने का हकदार है ।

वो पहले भारतीय थे , जो ऐवरेस्ट पर 8700 मीटर तक चढे । उन्होने जीवन मे 20 बार से ज्यादा बार 8000 मीटर तक चढने का दुर्लभ रेकाॅर्ड बनाया ।

उन्होने भारत के अंटार्कटिका मिशन पर , वहा की सबसे ऊँची चोटियो को फतेह किया । गुलमर्ग के हाई एल्टीट्यूट वारफेयर स्कूल के कमांडेंट , और इंडियन माउंटेनियरिंग स्कूल के प्रिसिंपल भी रहे । उनकी लिखी किताबे इस पर्वतारोही सैनिक की कलम पर खास पकड का सूबूत भी है ।

वो शानदार पर्वतारोही , वो ग्लेशियरो का सरताज , कर्नल नरेन्द्र “बुल” कुमार शर्मा, 31 दिसम्बर 2020 को चल बसा । मगर अफसोस देश के अहसान फरामोश लोग उस जियाले हीरो के नाम तक से परिचित नही ।

देश का हीरो , एक नायक , गुमनामी रहकर ही चल बसा ।

सर, हर देशवासी की आेर से आपको इस ऋणी नागरिक , और आपकी कुमायूँ रेजीमेंट की तरफ से शत शत नमन ……….

जय हिन्द वन्दे मातरम्

Article Tags:
Article Categories:
Literature

Leave a Reply

%d bloggers like this: