Jan 19, 2021
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ताल्लुक नही रहता…

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फिर मंज़िल से ताल्लुक नही रहता उनका,
जिनके हिस्से मे मुहब्बत के सफर आते है |
छूट जाता है कुछ ना कुछ ज़िन्दगी में,
बस रंज और मलाल के अफसाने रह जाते है |
जी लो कुछ लम्हे है साथ,
बीते हुए वो मंज़र फिर नही आते है |
मुहब्बत का सफर तो है ही गहरा सा,
फ़ना होके भी यहां.. किरदार उभर के आते है |

आलोक सावलिया

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Literature

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