Aug 21, 2021
54 Views
0 0

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया

Written by

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सोमनाथ, गुजरात में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उद्घाटन की गई परियोजनाओं में सोमनाथ समुद्र दर्शन पथ, सोमनाथ प्रदर्शनी केंद्र और पुराने (जूना) सोमनाथ का पुनर्निर्मित मंदिर परिसर शामिल हैं। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने श्री पार्वती मंदिर की आधारशिला भी रखी।

इस पावन अवसर में वरिष्ठ नेता एवं श्री सोमनाथ ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री अमित शाह (केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री), श्री श्रीपद येसो नाइक (पर्यटन और पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग राज्य मंत्री), श्री विजय रूपाणी (मुख्यमंत्री, गुजरात), श्री नितिनभाई पटेल (उपमुख्यमंत्री, गुजरात), श्री जवाहर चावड़ा (पर्यटन मंत्री, गुजरात राज्य सरकार) एवं श्री वासन अहीर (पर्यटन राज्य मंत्री, गुजरात राज्य सरकार), श्री राजेशभाई चुड़ासमा (सांसद, जूनागढ़) और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के ट्रस्टी– सचिव श्री पी के लाहिड़ी भी शामिल हुए। इस कार्यक्रम का संचालन पर्यटन मंत्रालय के सचिव श्री अरविंद सिंह ने किया। इस कार्यक्रम के दौरान, सोमनाथ में शुरू की गई विकास संबंधी विभिन्न अवसंरचना परियोजनाओं को प्रदर्शित करने वाली एक फिल्म भी दिखायी गयी।

दुनिया भर के श्रद्धालुओं को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने भारत के प्राचीन गौरव को पुनर्जीवित करने के लिये अदम्य इच्छाशक्ति दिखाई थी। सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर को स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र भावना से जोड़ा था। श्री मोदी ने कहा, “यह हमारा सौभाग्य है कि हम आजादी के 75वें वर्ष में सोमनाथ मंदिर को नई भव्यता प्रदान करने में सरदार साहब के प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को याद किया, जिन्होंने विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ तक कई मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि परंपरा और आधुनिकता का जो संगम उनके जीवन में था, आज देश उसे अपना आदर्श मानकर आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ और गुजरात के कच्छ के परिवर्तन जैसी पहलों को गुजरात ने बहुत नजदीक से देखा है, आधुनिकता को पर्यटन से जोड़ने का परिणाम देखा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हर कालखंड की यह मांग रही है कि हम धार्मिक पर्यटन की दिशा में भी नई संभावनाओं को खोजें और लोकल अर्थव्यवस्था से तीर्थ यात्राओं का जो रिश्ता रहा है उसे और मजबूत करें।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये शिव ही हैं जो विनाश में भी विकास का बीज अंकुरित करते हैं, संहार में भी सृजन को जन्म देते हैं। शिव अविनाशी हैं, अव्यक्त हैं और अनादि हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “शिव में हमारी आस्था हमें समय की सीमाओं से परे हमारे अस्तित्व का बोध कराती है, हमें समय की चुनौतियों से जूझने की शक्ति देती है।”

पवित्र मंदिर के इतिहास का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने स्मरण किया कि मंदिर को बार-बार तोड़ा गया, लेकिन हर हमले के बाद वह कैसे फिर उठ खड़ा हुआ। उन्होंने कहा, “यह इस विश्वास का प्रतीक है कि असत्य कभी सत्य को पराजित नहीं कर सकता और आतंक कभी आस्था को कुचल नहीं सकता।” उन्होंने कहा, “जो तोड़ने वाली शक्तियां हैं, जो आतंक के बलबूते साम्राज्य खड़ा करने वाली सोच है, वह किसी कालखंड में कुछ समय के लिये भले हावी हो जाये, लेकिन उसका अस्तित्व कभी स्थायी नहीं होता, वह ज्यादा दिनों तक मानवता को दबाकर नहीं रख सकती। यह उस समय भी सत्य था, जब कुछ आक्रमणकारी सोमनाथ के मंदिर को तोड़ रहे थे और आज भी उतना ही सत्य है, जब ऐसी सोच दुनिया के सामने खतरा बनी हुई है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से लेकर उसका भव्य जीर्णोद्धार सदियों की दृढ़ इच्छाशक्ति और वैचारिक निरंतरता के कारण संभव हुआ है। राजेंद्र प्रसाद जी, सरदार पटेल और केएम मुंशी जैसे महापुरुषों को आजादी के बाद भी इस अभियान के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। लेकिन, अंततः 1950 में सोमनाथ मंदिर आधुनिक भारत के दिव्य स्तंभ के रूप में स्थापित हो गया। देश कठिन समस्याओं के सौहार्दपूर्ण समाधान की ओर बढ़ रहा है। राम मंदिर के रूप में आधुनिक भारत की महिमा का एक उज्ज्वल स्तंभ बनकर सामने आ रहा है।

उन्होंने कहा कि हमारी सोच इतिहास से सीखकर वर्तमान को सुधारने की होनी चाहिए, एक नया भविष्य बनाने की होनी चाहिए। उन्होंने ‘भारत जोड़ो आंदोलन’के अपने मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उसका भाव केवल भौगोलिक या वैचारिक जुड़ाव तक सीमित नहीं है बल्कि विचारों के संपर्क से भी है। प्रधानमंत्री ने कहा, “ये भविष्य के भारत के निर्माण के लिए हमें हमारे अतीत से जोड़ने का भी संकल्प है।” उन्होंने कहा, “हमारे लिए इतिहास और धर्म का सार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास है।” प्रधानमंत्री ने भारत की एकता को रेखांकित करने में विश्वास और विश्वास प्रणाली की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ‘पश्चिम में सोमनाथ और नागेश्वर से लेकर पूरब में बैद्यनाथ तक, उत्तर में बाबा केदारनाथ से लेकर दक्षिण में भारत के अंतिम छोर पर विराजमान श्री रामेश्वर तक, ये 12 ज्योतिर्लिंग पूरे भारत को आपस में पिरोने का काम करते हैं। इसी तरह, हमारे चार धामों की व्यवस्था, हमारे शक्तिपीठों की संकल्पना, हमारे अलग अलग कोनों में अलग-अलग तीर्थों की स्थापना, हमारी आस्था की ये रूपरेखा वास्तव में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना की ही अभिव्यक्ति है।’

राष्ट्र की एकता को मजबूत करने में आध्यात्मिकता की भूमिका का उल्लेख जारी रखते हुए, प्रधानमंत्री ने पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय क्षमता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश आधुनिक अवसंरचना का निर्माण कर प्राचीन गौरव को पुनर्जीवित कर रहा है। उन्होंने रामायण सर्किट का उदाहरण दिया जो राम भक्तों को भगवान राम से संबंधित नए स्थानों से अवगत करा रहा है और उन्हें यह महसूस करा रहा है कि कैसे भगवान राम पूरे भारत के राम हैं। इसी तरह बुद्ध सर्किट दुनिया भर के भक्तों को सुविधाएं प्रदान करता है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पर्यटन मंत्रालय स्वदेश दर्शन योजना के तहत 15 विषयों पर पर्यटन सर्किट विकसित कर रहा है, जिससे उपेक्षित क्षेत्रों में पर्यटन के अवसर पैदा होंगे। केदारनाथ जैसे पहाड़ी इलाकों में विकास, चार धामों के लिए सुरंग और राजमार्ग, वैष्णव देवी में विकास कार्य, पूर्वोत्तर में हाई-टेक बुनियादी ढांचा दूरियां पाट रहे हैं। इसी तरह, 2014 में घोषित प्रसाद योजना के तहत 40 प्रमुख तीर्थ स्थलों का विकास किया जा रहा है, जिनमें से 15 पहले ही पूरे हो चुके हैं। गुजरात में 100 करोड़ रुपये से अधिक की तीन परियोजनाओं पर काम चल रहा है। तीर्थ स्थलों को जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश न केवल आम नागरिकों को पर्यटन के माध्यम से जोड़ रहा है बल्कि आगे भी बढ़ रहा है। देश, यात्रा और पर्यटन प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में 2013 के 65वें स्थान से 2019 में 34वें स्थान पर पहुंच गया है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में, गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री नरेन्द्र मोदी ने सभी धर्मों के तीर्थ स्थलों को ‘प्रसाद’ (तीर्थयात्रा कायाकल्प और अध्यात्मिक, विरासत संवर्धन अभियान) योजना के तहत लाने का काम किया और उनके इन्फ्रास्ट्रक्चर व उनके आसपास के क्षेत्रों में सुविधाओं के विकास पर जोर दिया।

गृह मंत्री ने बताया कि पिछले सात साल से, कई तीर्थस्थल ‘प्रसाद’ योजना से लाभान्वित हुए हैं और सभी धर्मों को मानने वाले अपने-अपने तीर्थस्थलों पर पूजा करने में सक्षम हुए हैं। उन्होंने कहा कि अरब सागर के तटों पर, डेढ़ किलोमीटर लंबे और आठ मीटर चौड़े कॉरिडोर का निर्माण किया गया है, जहां पर्यटक अपने परिवारों के साथ शाम को आराम कर सकते हैं और एक पर्यटक स्थल का एहसास कर सकते हैं।

श्री अमित शाह ने कहा कि श्रद्धालुओं को डिजिटल माध्यम से सोमनाथ के दर्शन और प्रार्थना में सक्षम बनाने के लिए, प्रधानमंत्री ने कई प्रयास किए हैं और उनकी निगरानी की है, जिसके परिणामस्वरूप सोमनाथ की डिजिटल प्रार्थना सबसे ज्यादा देखी जाने वाली प्रार्थनाओं में शामिल हो गई है।

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजयभाई रूपाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सोमनाथ के विकास को नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के विजन के तहत सोमनाथ का तीर्थस्थल के रूप में विकास करने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री रूपाणी ने प्रसाद योजना के अंतर्गत सोमनाथ में कई परियोजनाओं और सुविधाओं के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के सहयोग की प्रशंसा की।

पर्यटन मंत्रालय ने वर्ष 2014-15 में चिह्नित तीर्थस्थलों और विरासत स्थलों के एकीकृत विकास के उद्देश्य से राष्ट्रीय तीर्थयात्रा कायाकल्प और अध्यात्मिक, विरासत संवर्धन अभियान’ (प्रसाद) शुरू किया था। इस योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं को अंतिम रूप देने और उसे कार्यान्वित करने के क्रम में समान पहुंच की अवधारणा सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। इस योजना का उद्देश्य स्थलों पर तीर्थस्थल/धार्मिक और विरासत पर्यटन इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास का निर्माण है। वर्तमान में 24 राज्यों में 1,214.19 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 37 परियोजनाओं (15 पूरी हो चुकी परियोजनाओं सहित) को स्वीकृति दी जा चुकी है और योजना के तहत इन परियोजनाओं के लिए कुल 675.89 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है।

“प्रसाद योजना के तहत सोमनाथ, गुजरात में तीर्थयात्रा सुविधाओं के विकास से सम्बंधित परियोजना का अनुमोदन पर्यटन मंत्रालय द्वारा मार्च, 2017 में किया गया था। इस परियोजना की लागत 45.36 करोड़ रुपये थी। परियोजना के विभिन्न घटकों जैसे ‘पार्किंग क्षेत्र विकास’, ‘पर्यटक सुविधा केंद्र’ और ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ को सफलतापूर्वक पूरा करके जुलाई, 2020 में राष्ट्र को समर्पित किया गया था। विश्वस्तरीय तीर्थयात्रा पर्यटन के बुनियादी ढांचे की परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इन सुविधाओं में शामिल हैं- यात्रियों के लिए अमानती सामान घर, सार्वजनिक सुविधा सहित प्रतीक्षालय, बच्चों के लिए कमरे, विशेष रूप से सक्षम, कारों, बसों और दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, चिकित्सा सुविधाएं, स्मारिका दुकानें, पारंपरिक दुकानें, जलपान गृह, पुस्तकालय, बैठक हॉल, बहुउद्देश्यीय कक्ष, वरिष्ठ नागरिक कक्ष, सत्संग भवन, पेयजल, समर्पित पार्किंग, सौर ऊर्जा विद्युत गृह, उद्यान का विकास आदि। इस योजना के तहत निर्मित पर्यटक सुविधा केंद्र में आज एक प्रदर्शनी गैलरी का उद्घाटन हुआ है, जिसे श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा विकसित किया गया है।

जूना सोमनाथ मंदिर परिसर के विकास कार्यों में सभी की पहुxच के लिए रैंप, आंगन, तीर्थयात्रियों के बैठने की व्यवस्था, 15 दुकानें, लिफ्ट और दो बड़े हॉल शामिल हैं। इसके लिए श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा 3.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

श्री सोमनाथ मंदिर परिसर में प्रस्तावित पार्वतीमाता मंदिर 1650 वर्गमीटर के क्षेत्रफल एवं 71 फीट की ऊंचाई के साथ एक भव्य संरचना होगी। इसके निर्माण में अंबाजी, बनासकांठा के अरास पत्थरों का उपयोग किया जायेगा। मूल मंदिर के अनुरूप 44 स्तम्भ होंगे, जिन्हें कलात्मक तरीके से संगमरमर का उपयोग करके बनाया जाएगा। मंदिर का मुख्य गर्भ गृह 380 वर्गमीटर का होगा, जबकि नृत्य मंडप का क्षेत्रफल 1250 वर्गमीटर होगा।

प्रसाद योजना के तहत गुजरात राज्य के लिए शुरू की जाने वाली नई परियोजनाएं हैं: मां अंबाजी मंदिर, बनासकांठा में तीर्थयात्री सुविधाओं का विकास और सोमनाथ में सार्वजनिक प्लाजा/एंट्री प्लाजा का विकास।

तीर्थयात्रियों की आवाजाही का प्रबंधन करने और मंदिर परिसर में पैदल चलने वालों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक प्लाजा/ एंट्री प्लाजा अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। इन अत्याधुनिक सुविधाओं में दिव्यांगजनों और आपातकालीन वाहनों (एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहन) के लिए पार्किंग की सुविधा शामिल होगी। एंट्री प्लाजा की इमारत में विश्राम कक्ष, अमानती सामान घर (क्लोक रूम), कैफेटेरिया तथा महिलाओं एवं पुरुषों के लिए शौचालय और तीर्थयात्रियों की कतार के लिए बने परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए छतरी से युक्त व्यवस्था जैसी अन्य सार्वजनिक सुविधाएं होंगी। आइकॉनिक डेस्टिनेशन डेवलपमेंट स्कीम (आईडीडीएस) के तहत तैयार मास्टर प्लान को ध्यान में रखते हुए इन सुविधाओं के लिए स्थान का प्रस्ताव किया गया है। अंबाजी मंदिर से संबंधित परियोजना के तहत, पर्यटक सुविधा केंद्र, पार्किंग, सार्वजनिक सुविधाएं, अमानती सामान घर (क्लोक रूम), गब्बर हिल पर सीढ़ियों का विकास और अन्य सुविधाओं जैसे तीर्थ पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित किया जाना है।

पर्यटन मंत्रालय द्वारा अपनी इंटीग्रेटड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट स्कीम (आईडीडीएस) के तहत प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों में से एक के रूप में सोमनाथ के विकास को प्रस्तावित किया गया है, जिसमें प्रभास पाटन संग्रहालय, पर्यटक सुविधाएं, हाट आदि जैसे घटकों का विकास शामिल है। इस पूरे क्षेत्र का व्यापक और समग्र विकास सुनिश्चित करते हुए इस विचाराधीन परियोजना के तहत सोमनाथ को बेहतर संपर्क– सुविधा (कनेक्टिविटी) प्रदान करने के लिए केशोद हवाई अड्डा, राष्ट्रीय राजमार्ग-51 का उन्नयन, सी-प्लेन सेवाओं का विकास आदि जैसे कुछ क्षेत्रीय उपाय भी प्रस्तावित हैं।

इन सबके अलावा, पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना के तहत गुजरात सरकार के लिए निम्नलिखित परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है:

 

 सर्किट का नामपरियोजना का नामस्वीकृत लागत

(करोड़ रुपये में)

जारी की गई राशि

(करोड़ रुपये में)

वास्तविक प्रगति
हेरिटेज सर्किटअहमदाबाद-राजकोट-पोरबंदर– बारदोली-दांडी (2016-17) का विकास59.1754.7995%
हेरिटेज सर्किटवडनगर–मोढेरा (2016-17) का विकास91.8487.2598%
बौद्ध सर्किटजूनागढ़-गिरसोमनाथ-भरूच-कच्छ-भावनगर-राजकोट-मेहसाणा का विकास

(2017-18)

28.6719.2193%

 

Article Categories:
Business · National

Leave a Reply

%d bloggers like this: